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शुक्रवार, २० ऑगस्ट, २०२१

देशभक्ती गीते-6

 देशभक्ती गीते

 नन्हें-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है ?

 

नन्हें-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है ?

मुट्ठी में है तक़दीर  हमारी,

हमने क़िस्मत  बस में किया है।

 

भोली-भाली मतवाली आँखों में क्या है ?

आँखों में झूमे उम्मीदों की दिवाली,

आने वाली दुनिया का सपना सजा है।

 

भीख में जो मोती मिले, लोगे या न लोगे?

ज़िन्दगी के आँसुओं का बोलो क्या करोगे?

भीख में जो मोती मिले तो भी हम न लेंगे,

ज़िन्दगी के आँसुओं की माला पहनेंगे,

मुश्किलों से लड़ते-भिड़ते जीने में मज़ा है।

 

हमसे न छुपाओ बच्चों हमें तो बताओ,

आने वाली दुनिया कैसी होगी, समझाओ।

आने वाली दुनिया में सब के सर पे ताज होगा,

न भूखों की भीड़ होगी, न दुखों का राज होगा,

बदलेगा ज़माना ये सितारों पे लिखा है।

 

 

देशभक्ती गीते/ अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं

 

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं,

सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं।

हमने सदियों में ये आज़ादी की नेमत पाई है,

सैंकड़ों कुर्बानियाँ देकर ये दौलत पाई है।

मुस्कुरा कर खाई हैं सीनों पे अपने गोलियाँ,

कितने वीरानों से गुज़रे हैं तो जन्नत  पाई है।

ख़ाक में हम अपनी इज्ज़त को मिला सकते नहीं।

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं।

 

क्या चलेगी ज़ुल्म की अहल-ए-वफ़ा के सामने,

आ नहीं सकता कोई शोला हवा के सामने।

लाख फ़ौजें ले के आए अमन का दुश्मन कोई,

रुक नहीं सकता हमारी एकता के सामने |

हम वो पत्थर हैं जिसे दुश्मन हिला सकते नहीं

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं।

 

वक़्त की आवाज़ के हम साथ चलते जाएँगे,

हर क़दम पर ज़िन्दगी का रुख बदलते जाएँगे।

'गर वतन में भी मिलेगा कोई गद्दार-ए-वतन ,

अपनी ताक़त से हम उसका सर कुचलते जाएँगे।

एक धोखा खा चुके हैं, और खा सकते नहीं।

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं।

 

हम वतन के नौजवाँ हैं, हम से जो टकराएगा,

वो हमारी ठोकरों से ख़ाक में मिल जायेगा।

वक़्त के तूफ़ान में बह जाएँगे ज़ुल्म-ओ-सितम,

आसमाँ पर ये तिरंगा उम्र भर लहरायेगा।

जो सबक बापू ने सिखलाया भुला सकते नहीं।

सर कटा सकते है लेकिन सर झुका सकते नहीं।

 

 

देशभक्ती गीते/ ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी क़सम

 

तू ना रोना, कि तू है भगत सिंह की माँ,

मर के भी लाल तेरा मरेगा नहीं।

डोली चढ़ के तो लाते हैं दुल्हन सभी,

हँस के हर कोई फाँसी चढ़ेगा नहीं।

 

जलते भी गये, कहते भी गये,

आज़ादी के परवाने,

जीना तो उसी का जीना है।

जो मरना वतन पे जाने।

 

ऐ वतन, ऐ वतन हमको तेरी क़सम,

तेरी राहों में जाँ तक लुटा जाएँगे।

फूल क्या चीज़ है, तेरे क़दमों पे हम,

भेंट अपने सरों की चढ़ा जाएँगे।

 

कोई पंजाब से, कोई महाराष्ट्र से,

कोई यूपी से है, कोई बंगाल से ।

तेरी पूजा की थाली में लाए हैं हम,

फूल हर रंग के, आज हर डाल से ।

नाम कुछ भी सही, पर लगन एक है,

जोत से जोत दिल की जगा जाएँगे।

ऐ वतन, ऐ वतन हमको तेरी क़सम,

तेरी राहों में जाँ तक लुटा जाएँगे।

तेरी जानिब  उठी जो कहर की नज़र,

उस नज़र को झुका के ही दम लेंगे हम

तेरी धरती पे है जो क़दम ग़ैर का,

उस क़दम का निशाँ तक मिटा देंगे हम।

जो भी दीवार आएगी अब सामने

ठोकरों से उसे हम गिरा जाएँगे।

ऐ वतन, ऐ वतन हमको तेरी क़सम,

तेरी राहों में जाँ तक लुटा जाएँगे।

 

सह चुके हैं सितम हम बहुत ग़ैर के

अब करेंगे हर एक वार का सामना

झुक सकेगा न अब सरफ़रोशों का सर

चाहे हो ख़ूनी तलवार का सामना

सर पे बाँधे कफ़न हम तो हँसते हुए

मौत को भी गले से लगा जाएँगे।

ऐ वतन, ऐ वतन हमको तेरी क़सम,

तेरी राहों में जाँ तक लुटा जाएँगे।

 

जब शहीदों की अर्थी उठे धूम से,

देशवालों तुम आँसू बहाना नहीं।

पर मनाओ जब आज़ाद भारत का दिन,

उस घड़ी तुम हमें भूल जाना नहीं ।

लौट कर आ सके ना जहाँ में तो क्या,

याद बन के दिलों में तो आ जाएँगे।